सगाई के बाद विवाह टूट जाना – किन ग्रह प्रभाव / भाव से ऐसा होता है ? जन्मकुण्डली से जानें…

ऐसा देखा जाता है कि विवाह का बातचीत तय हो गई हो लेनदेन हो गया हो यहाँ तक की सगाई समारोह / छेका हो गया हो इसके बाद भी विवाह नहीं हुआ ऐसा कई घटना सुनने को मिलता है। आज इसी संबंध में जानकारी देने का प्रयास है। विवाह भाव, सप्तमेश, शुक्र, गुरु, राहु-केतु और दशा-अंतर्दशा के संयुक्त प्रभाव से देखा जाता है।

इसके लिए प्रमुख ग्रह योग योग —

== सप्तमेश का 6, 8 या 12वें भाव में होना – सप्तमेश कमजोर होकर इन भावों में चला जाए और साथ में पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो विवाह संबंध में बाधा या टूटने की संभावना बढ़ सकती है।

== सप्तम भाव पर शनि का अशुभ प्रभाव – सप्तम भाव में शनि, या शनि की कठोर दृष्टि होने पर विवाह में देरी, मतभेद या संबंध टूटने की स्थिति बन सकती है। विशेषकर जब सप्तमेश भी कमजोर हो।

== मंगल का अत्यधिक अशुभ प्रभाव – सप्तम भाव, सप्तमेश या शुक्र पर मंगल का अशुभ प्रभाव होने पर क्रोध, अहंकार, विवाद और पारिवारिक टकराव बढ़ सकते हैं। इसे सामान्यतः मांगलिक प्रभाव के संदर्भ में भी देखा जाता है।

== शुक्र की कमजोरी या पीड़ित होना – पुरुष और महिला दोनों की कुंडली में शुक्र विवाह एवं दांपत्य सुख का महत्वपूर्ण कारक है। शुक्र पर राहु, केतु, शनि या मंगल का गंभीर प्रभाव हो तो प्रेम-संबंध और वैवाहिक निर्णयों में बाधा आ सकती है।

== राहु का सप्तम भाव/सप्तमेश से संबंध – राहु भ्रम, अचानक निर्णय, गलतफहमी और असामान्य परिस्थितियां पैदा कर सकता है। सगाई के बाद अचानक रिश्ता टूटने में राहु की भूमिका देखी जाती है।

== केतु का सप्तम भाव से संबंध – केतु वैराग्य और अलगाव का कारक माना जाता है। सप्तम भाव या सप्तमेश से मजबूत अशुभ संबंध होने पर रिश्ता बनने के बाद मन बदलने की स्थिति आ सकती है।

== दशा-अंतर्दशा का प्रभाव – सगाई के बाद वास्तविक घटना कब होगी, यह देखने में विंशोत्तरी दशा-अंतर्दशा और गोचर बहुत महत्वपूर्ण हैं। केवल जन्मकुंडली में योग देखकर यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि विवाह अवश्य टूटेगा।

सगाई टूटने के मामले में मैं मुख्यतः 1st, 2nd, 5th, 7th, 8th और 11वें भाव, सप्तमेश, शुक्र, गुरु, राहु-केतु तथा सगाई से लेकर विवाह की संभावित तारीख तक की दशा और गोचर देखना आवश्यक।

वैसे कोई एक योग अकेले विवाह टूटने में निश्चित नहीं होता, कई बार कुंडली में मजबूत शुभ योग इन दोषों को काफी हद तक निष्प्रभावी कर देते हैं। इसलिए कुंडली विश्लेषण के आधार पर आपको बताया जा सकता है।

ज्योतिषाचार्य रवि भास्कर

हस्तरेखाविद, ज्योतिषविद एवं वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ

भास्कर ज्योतिष अनुसंधान केंद्र
गया जी, बिहार

संपर्क सूत्र / WhatsApp : 9801326260

Website : www.astrologerbhaskarjyotish.com

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