हस्तरेखा शास्त्र से जानें — विवाह की दिशा एवं वैवाहिक जीवन
वैवाहिक जीवन किसी भी जातक अथवा जातिका के दांपत्य जीवन का मूल आधार होता है। प्रत्येक व्यक्ति की यह स्वाभाविक जिज्ञासा रहती है कि उसका वैवाहिक जीवन कैसा होगा, विवाह कहाँ और किस दिशा में होगा, जीवनसाथी से संबंध कैसे रहेंगे आदि। केवल जातक ही नहीं, बल्कि माता-पिता और परिवारजन भी इस विषय को लेकर चिंतित रहते हैं।
इसी संदर्भ में भास्कर गुरु जी द्वारा प्रस्तुत यह लेख अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार जन्मकुण्डली के माध्यम से विवाह से जुड़ी अनेक जानकारियाँ प्राप्त की जाती हैं, उसी प्रकार हथेली में स्थित रेखाओं के माध्यम से भी विवाह की दिशा, स्वरूप और वैवाहिक जीवन की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके लिए न तो जन्म-तिथि की आवश्यकता होती है, न जन्म-समय और न ही जन्म-स्थान की।
विवाह रेखा से जानें — विवाह किस दिशा में होगा
- यदि किसी जातक/जातिका की विवाह रेखा हथेली के मध्य भाग में स्थित हो, तो विवाह पूर्व दिशा में होने की संभावना रहती है।
वहीं यदि विवाह रेखा अंगूठे के मूल (शुक्र पर्वत) की ओर झुकी हो, तो विवाह पश्चिम दिशा में हो सकता है। - यदि विवाह रेखा मणिबंध रेखाओं के मध्य क्षेत्र में दिखाई दे, तो विवाह उत्तर दिशा में होने का संकेत देती है।
- यदि विवाह रेखा किसी अंगुली के मूल भाग के समीप स्थित हो, तो विवाह दक्षिण दिशा में होने की संभावना रहती है।
विवाह रेखा और वैवाहिक जीवन के संकेत
- विवाह रेखा यदि कई भागों में कटी हुई हो तथा चंद्र पर्वत पर आड़ी-तिरछी रेखाएँ हों, तो वैवाहिक जीवन में बाधाएँ एवं मानसिक अस्थिरता देखी जाती है।
- यदि विवाह रेखा सूर्य रेखा को काटे अथवा शुक्र पर्वत अत्यधिक विकसित हो, तो अनमेल विवाह या परिवार की असहमति के योग बनते हैं।
- विवाह रेखा यदि अन्य प्रधान रेखाओं की तुलना में अत्यधिक ऊँची या बहुत नीचे हो, तो ऐसे जातक/जातिकाएँ अंतरजातीय विवाह की ओर अग्रसर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य विवाह में विलंब या कठिनाई देखी जाती है।
- प्रेम विवाह के लिए हथेली में गुरु, शुक्र और मंगल पर्वत का प्रभावी होना आवश्यक होता है। साथ ही बुध ग्रह के क्षेत्र में स्थित रेखाएँ भी प्रेम संबंधों को स्पष्ट करती हैं।
- यदि भाग्य रेखा पर क्रॉस, विवाह रेखा पर द्वीप (Island) तथा शुक्र पर्वत कम उभरा हुआ हो, तो वैवाहिक जीवन में सुख की कमी रहती है।
- विवाह रेखा के अंत में गुच्छा, मंगल पर्वत से कोई रेखा विवाह रेखा को काटती हो, विवाह रेखा से शाखा निकलकर मस्तिष्क रेखा से मिलती हो, या शुक्र पर्वत से प्रभाव रेखा जीवन रेखा को काटते हुए विवाह रेखा से मिले — तो अलगाव या तलाक की संभावना बनती है।
- यदि विवाह रेखाएँ एक से अधिक हों, तो जो रेखा सबसे लंबी और स्पष्ट हो वही मुख्य विवाह रेखा मानी जाती है। शेष छोटी रेखाएँ प्रेम संबंध, सगाई या आकर्षण को दर्शाती हैं।
यदि मुख्य विवाह रेखा लंबी होकर अंत में पतली हो जाए, तो जीवनसाथी के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव रह सकता है।
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हस्तरेखाविद आचार्य रवि भास्कर
हस्तरेखा फलादेश | जन्मकुण्डली फलादेश | ज्योतिषीय उपाय
हस्तलिखित जन्मपत्रिका निर्माण एवं वास्तुशास्त्र परामर्श
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