लक्ष्मी-नारायण योग का बलिष्ठ भाव कौन ? जन्मकुंडली में…

कुण्डली में लक्ष्मी-नारायण योग मुख्यतः नवम भाव और लग्न के स्वामी के शुभ संबंध से बनता है

== लग्नेश और नवमेश की युति
== लग्नेश और नवमेश का परस्पर दृष्टि संबंध
== लग्नेश और नवमेश का परस्पर राशि परिवर्तन (परिवर्तन योग)
== दोनों ग्रहों का केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) में बलवान होना

बलिष्ठ भाव :::::
लग्नेश और नवमेश स्वगृही, उच्च राशि, मूलत्रिकोण या शुभ ग्रहों से प्रभावित हों तथा पाप प्रभाव से मुक्त हों, तो लक्ष्मी-नारायण योग अत्यंत शक्तिशाली होकर धन, प्रतिष्ठा, सुख-सुविधा और सामाजिक सम्मान प्रदान करता है।

खासकर नवम भाव को लक्ष्मी-नारायण योग का सबसे महत्वपूर्ण एवं मूल भाव माना जाता है, जबकि लग्न भाव इसके फल को जीवन में प्रकट करने की शक्ति देता है।

लक्ष्मी-नारायण योग का बलिष्ठ भाव कौन ? जन्मकुंडली में

कुण्डली में लक्ष्मी-नारायण योग मुख्यतः नवम भाव और लग्न के स्वामी के शुभ संबंध से बनता है

== लग्नेश और नवमेश की युति
== लग्नेश और नवमेश का परस्पर दृष्टि संबंध
== लग्नेश और नवमेश का परस्पर राशि परिवर्तन (परिवर्तन योग)
== दोनों ग्रहों का केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) में बलवान होना

बलिष्ठ भाव :::::
लग्नेश और नवमेश स्वगृही, उच्च राशि, मूलत्रिकोण या शुभ ग्रहों से प्रभावित हों तथा पाप प्रभाव से मुक्त हों, तो लक्ष्मी-नारायण योग अत्यंत शक्तिशाली होकर धन, प्रतिष्ठा, सुख-सुविधा और सामाजिक सम्मान प्रदान करता है।

खासकर नवम भाव को लक्ष्मी-नारायण योग का सबसे महत्वपूर्ण एवं मूल भाव माना जाता है, जबकि लग्न भाव इसके फल को जीवन में प्रकट करने की शक्ति देता है।

ज्योतिषाचार्य रवि भास्कर
हस्तरेखाविद, ज्योतिषविद एवं वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ
भास्कर ज्योतिष अनुसंधान केंद्र, गया जी, बिहार
संपर्क सूत्र / WhatsApp : 9801326260
Website : www.astrologerbhaskarjyotish.com

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