1️⃣ गुरु (बृहस्पति) - गुरु ज्ञान, शिक्षा और अध्यापन का मुख्य ग्रह हैं, कुंडली में गुरु लग्न, 5वें, 9वें या 10वें भाव में हो या इन भावों को दृष्टि दे, गुरु का स्वगृही (धनु, मीन) या उच्च (कर्क) होना बहुत शुभ माना जाता है, तो शिक्षक बनने की संभावना।
2️⃣ 5वां भाव (विद्या और बुद्धि) का भाव - अध्ययन और बुद्धिमत्ता का भाव है। 5वें भाव का स्वामी मजबूत हो या गुरु/बुध से संबंध बना रहा हो तो ऐसे जातक /जातिका में पढ़ाने की क्षमता होगी।
3️⃣ 9वां भाव (उच्च शिक्षा) - 9वां भाव उच्च शिक्षा, धर्म और गुरु तत्व का प्रतीक होता है। 9वें भाव या उसके स्वामी का गुरु या बुध से संबंध होने पर शिक्षक, प्रोफेसर या आध्यात्मिक गुरु बनने का योग
4️⃣ बुध ग्रह मजबूत हो - बुध बुद्धि, वाणी, लेखन और समझाने की क्षमता देता है। बुध मजबूत हो और 10वें भाव (कर्म भाव) से जुड़ा हो तो पढ़ाने या ट्रेनिंग देने के क्षेत्र में जा सकता है।
5️⃣ 10वां भाव (कर्म भाव) - 10वें भाव का संबंध गुरु, बुध या 5वें/9वें भाव से हो तो शिक्षा क्षेत्र में करियर बनने की संभावना रहती है।
6️⃣ गुरु + बुध का संबंध ज्ञान और समझाने की क्षमता
गुरु + सूर्य का संबंध प्रतिष्ठित शिक्षक या प्रोफेसर
गुरु 9वें या 10वें भाव में अध्यापन क्षेत्र में सम्मान
= कुंडली में गुरु, बुध, 5वां, 9वां और 10वां भाव मजबूत और आपस में जुड़े हों, तो शिक्षा, अध्यापन, प्रोफेसर, कोचिंग या आध्यात्मिक गुरु के रूप में सफल होने की संभावना।
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ज्योतिषाचार्य रवि रंजन भास्कर
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