किसी जातक का जन्म किस प्रकार के परिवार में होगा ? इसका ज्योतिषीय संकेत मुख्य रूप से द्वितीय भाव, चतुर्थ भाव, नवम भाव, दशम भाव एवं एकादश भाव से जानकारी प्राप्त होती है।
🔹 द्वितीय भाव एवं उसके स्वामी बलिष्ट होना :::: द्वितीय भाव धन, परिवार और पारिवारिक संसाधनों का कारक होता है, द्वितीय भाव या उसका स्वामी शुभ ग्रहों से प्रभावित हो तथा उच्च, स्वराशि या केंद्र-त्रिकोण में स्थित हो तो जातक संपन्न परिवार में जन्म ले सकता है।
🔹 लग्नेश और धनेश का शुभ संबंध होना :::: लग्नेश एवं द्वितीयेश का युति, दृष्टि या परस्पर संबंध आर्थिक रूप से मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि का संकेत देता है।
🔹 नवम भाव का मजबूत होना ::::: नवम भाव पूर्व जन्म के पुण्य और भाग्य का सूचक होता है, नवमेश बलवान हो तथा शुभ ग्रहों से युक्त हो तो जातक / जातिका को जन्म से ही सुविधाएँ और पारिवारिक सहयोग प्राप्त होता है।
🔹 गुरु एवं शुक्र का शुभ प्रभाव ::::: गुरु धन, वैभव और समृद्धि का कारक ग्रह है, शुक्र भौतिक सुख-सुविधाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, इन ग्रहों का लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, नवम या एकादश भाव से संबंध आर्थिक समृद्धि बढ़ाता है।
🔹 धन योग एवं राजयोग :::: कुंडली में धन योग, लक्ष्मी योग, गजकेसरी योग या अन्य शुभ राजयोग बन रहे हों तो जातक / जातिका को जन्म से ही अच्छा आर्थिक वातावरण प्राप्त हो सकता है।
नोट ::: आप इस योग के आधार पर निष्कर्ष पर नहीं चले जाएं, धनी परिवार में जन्म होना, संपूर्ण जन्मकुंडली, नवांश, ग्रहबल तथा दशाओं का समग्र विश्लेषण से पूर्ण जानकारी मिलती है।
ज्योतिषाचार्य रवि रंजन भास्कर
हस्तरेखा, जन्मकुंडली विश्लेषण एवं वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ
भास्कर ज्योतिष अनुसंधान केंद्र, गया (बिहार)
📞 Call / WhatsApp: 9801326260
www.astrologerbhaskarjyotish.com