जन्मकुंडली में ग्रहों, भावों एवं उनकी पारस्परिक स्थिति का अध्ययन करके यह जाना जा सकता है कि विवाह प्रेम संबंध के माध्यम से होने की अधिक संभावना है या परिवार की सहमति एवं पारंपरिक रीति से।
कुंडली में ये देखा जाना चाहिए :::
🔹 पंचम भाव (प्रेम एवं आकर्षण) की स्थिति
🔹 सप्तम भाव (विवाह) एवं उसके स्वामी ग्रह की शक्ति
🔹 शुक्र, चन्द्रमा, गुरु एवं राहु का प्रभाव
🔹 पंचमेश एवं सप्तमेश का संबंध
🔹 नवांश कुंडली का विश्लेषण
🔹 विवाह में परिवार की भूमिका एवं सहमति के योग
✔ प्रेम विवाह होगा या पारंपरिक (Arrange Marriage)?
✔ परिवार की सहमति मिलेगी या विरोध रहेगा?
✔ विवाह में देरी या बाधा के योग हैं या नहीं?
✔ विवाह का संभावित समय क्या है?
✔ दाम्पत्य जीवन कैसा रहेगा?
📲 ऑनलाइन परामर्श सुविधा उपलब्ध
👨🏫 आचार्य रवि रंजन भास्कर
हस्तरेखा, जन्मकुण्डली एवं वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ
📍 गया, बिहार
📞 संपर्क / WhatsApp: 9801326260
🌐 www.astrologerbhaskarjyotish.com
प्रेम विवाह होगा या पारंपरिक (Arrange Marriage)? अपनी जन्मकुंडली के माध्यम से जानें विवाह से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत।”