आजकल के परिवेश में ज्योतिषशास्त्र सिखने की ललक लोगो में है, आपके भाग्य में ज्योतिषविद बनने का योग है या नहीं ये जानना अत्यंत आवश्यक है जन्मकुण्डली में ग्रह प्रभाव होना अत्यंत आवश्यक है अगर नहीं है तो आपका अथक प्रयास व्यर्थ जायेगा, भास्कर गुरूजी के पास कई ऐसे कॉल आये की गुरूजी मैंने ज्योतिष में पीएचडी की परन्तु कोई लाभ नहीं, बताई गई फलादेश लोगो का फलित नहीं हो रहा है जबकि किताब में वैसा ही लिखा है परन्तु फलित नहीं मैच कर रहा है, वैसे लोगो से कहना है की ज्योतिषी बनने के लिए आपका अध्ययन, शोध ज्ञान के साथ ग्रह प्रभाव, कई ग्रहों, भावों और उनके संबंधों का विशेष महत्व होता है, ग्रहों का साथ नहीं हो, ईश्वर आशीर्वाद आपके पक्ष में न हो तो आपका सारा प्रयास व्यर्थ जायेगा।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी जातक/ जातिका को एक सफल ज्योतिषी बनने का प्रमुख ज्योतिषीय योग
ज्योतिष एक ऐसी दिव्य विद्या है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने कर्मों के आधार को समझकर जीवन में उचित मार्गदर्शन प्राप्त करता है और आगे बढ़ता है। यह विद्या जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता एवं सही निर्णय लेने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
इस लेख के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि किन व्यक्तियों में ज्योतिष विद्या को ग्रहण करने तथा उसमें पारंगत होने की विशेष क्षमता होती है। ज्योतिष विद्या में गहन ज्ञान, सतत अध्ययन तथा अनुभव का विशेष महत्व है। एक सफल ज्योतिषविद वही बन सकता है जो सच्ची निष्ठा, लगन तथा ईश्वर-भक्ति के साथ इस ज्ञान को अर्जित करे और परमब्रह्म की कृपा प्राप्त करे।
एक सफल ज्योतिषविद बनने के लिए जन्मकुण्डली अथवा हस्तरेखा (Palm) में शुभ ग्रहों का प्रभाव एवं उनकी बलिष्ठ स्थिति अत्यंत आवश्यक मानी गई है।
एक ज्योतिषी में निम्नलिखित गुण एवं ग्रह योग पाए जाते हैं
- जन्मकुण्डली में लग्न, पंचम एवं नवम भाव मजबूत हों तथा बुध, गुरु, शुक्र, शनि एवं केतु ग्रह शुभ एवं सशक्त स्थिति में हों। ऐसे ग्रहयोग जातक को ज्योतिष विद्या के अध्ययन की ओर अग्रसर करते हैं।
- दशमेश बुध के नवांश में स्थित हो तो जातक में लेखन-कौशल, ज्योतिषीय गणना, ग्रह-नक्षत्रों से संबंधित व्यवसाय, पूजा-पाठ, पुरोहित कर्म एवं आध्यात्मिक ज्ञान की विशेष योग्यता विकसित होती है।
- नवम भाव में मिथुन या कर्क राशि का सूर्य, स्वराशि का चन्द्रमा, लग्नेश तथा एकादशेश बुध, लग्नस्थ अथवा स्वराशिगत शुक्र, मीन राशि का शनि तथा पंचम भाव में स्थित केतु जातक को एक श्रेष्ठ ज्योतिषविद बनने में सहायता प्रदान करते हैं।
- लग्न भाव अथवा लग्नेश का बुध या गुरु से संबंध हो, अथवा बुध केन्द्र में स्थित हो तथा शुक्र लग्न में स्वराशि का हो, तो जातक एक अच्छा ज्योतिषी बन सकता है।
- जन्मकुण्डली में बुध और शुक्र लग्न भाव में युति बना रहे हों, शुक्र स्वराशिगत हो तथा गुरु लाभ भाव में मीन राशि में स्थित हो, तो जातक एक सफल एवं लोकमान्य ज्योतिषी बनता है।
- चन्द्रमा और गुरु की युति पंचम या नवम भाव में हो अथवा इन दोनों ग्रहों का दृष्टि संबंध इन भावों से बन रहा हो, तो जातक विशेष रूप से हस्तरेखा विज्ञान में सफलता प्राप्त कर सकता है।
- गुरु पंचम भाव में स्थित हो, मित्र राशि का चन्द्रमा सप्तम भाव में हो, शुक्र अपनी ही राशि में नवम भाव में स्थित हो, सूर्य मिथुन राशि में तथा बुध एकादश भाव में स्थित हो, तो जातक अत्यंत कुशाग्र बुद्धि, प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं ओजस्वी वाणी का स्वामी होता है। ऐसा व्यक्ति ज्योतिषीय गणनाओं में दक्ष होता है तथा लगभग 25–26 वर्ष की आयु में ही लोकप्रिय कथावाचक, कुशल हस्तरेखाविद एवं सटीक फलादेश करने वाले ज्योतिषी के रूप में ख्याति अर्जित कर सकता है।
- नवम भावस्थ शुक्र पर पंचम भावस्थ गुरु की पंचम दृष्टि यह संकेत देती है कि जातक भविष्य में ज्योतिष के क्षेत्र में उच्च शिखर तक पहुँच सकता है।
- शनि ग्रह को भी ज्ञान, शोध एवं ज्योतिष का आधार ग्रह माना गया है। यदि जन्मकुण्डली में शनि मीन राशि में स्थित हो तो जातक अच्छा ज्योतिषी बन सकता है। साथ ही, जब गोचर में शनि जन्मस्थ शनि से सप्तम स्थान में भ्रमण करे तथा किसी उच्चस्थ ग्रह की दशा-अन्तर्दशा चल रही हो, तब जातक ज्योतिष संबंधी विशेष ज्ञान, यश, कीर्ति, सम्मान एवं धन प्राप्त कर सकता है।
- जन्मपत्रिका में बुध एवं केतु लग्न भाव में स्थित हों, शनि मीन राशि में हो तथा चन्द्र-गुरु की युति लाभ भाव में गजकेसरी योग का निर्माण कर रही हो, तो ऐसा जातक ज्योतिष विद्या में विशेष सफलता प्राप्त कर सकता है।
- शनि एवं मंगल अपनी उच्च राशियों में स्थित हों तथा पंचम भाव में उच्च का शनि विशेष स्थिति में हो, साथ ही बुध एवं केतु पर उच्चस्थ शनि की दृष्टि हो, तो जातक प्रकाण्ड विद्वान, सफल ज्योतिषी एवं उच्च बौद्धिक क्षमता वाला होता है।
निष्कर्ष::::
जन्मपत्रिका में उपर्युक्त ग्रहयोग जितने अधिक बलवान एवं शुभ स्थिति में होंगे, जातक ज्योतिष विद्या में उतना ही अधिक पारंगत होगा। वह अपने पास आने वाले व्यक्तियों का उचित मार्गदर्शन कर सकेगा तथा उनके जीवन की चुनौतियों एवं संभावनाओं के विषय में सार्थक दिशा प्रदान कर सकेगा।
आपकी जन्मकुण्डली अथवा हस्तरेखा में ऐसे ग्रहयोग एवं संकेत विद्यमान हैं, तो आप एक सफल ज्योतिषविद एवं हस्तरेखाविद बन सकते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि आप विधिवत अध्ययन करें, निरंतर अभ्यास करें, गूढ़ विषयों का गहन शोध करें तथा जीवनभर पुस्तकों एवं शास्त्रों का अध्ययन जारी रखें।
निस्संदेह, उचित परिश्रम, साधना और अनुभव के साथ आप एक सफल ज्योतिषविद एवं हस्तरेखाविद बन सकते हैं।
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ज्योतिषाचार्य रवि भास्कर
हस्तरेखाविद, ज्योतिषविद एवं वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ
गया, बिहार
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