जीवन में समय के अनुसार सुख-दुःख, धन की कमी, आर्थिक प्रबलता, नौकरी में सफलता तथा विभिन्न प्रकार के उतार-चढ़ाव आते-जाते रहते हैं। लगभग हर व्यक्ति की यह जिज्ञासा होती है कि मेरा भाग्योदय कब होगा? मेरा अच्छा समय कब आएगा?
इन प्रश्नों के उत्तर जन्मकुंडली एवं हस्तरेखा के माध्यम से जानने का प्रयास किया जा सकता है। जन्मकुंडली के लग्न, ग्रहों की स्थिति तथा दशा-अंतरदशा के आधार पर भाग्योदय के संभावित समय का संकेत प्राप्त होता है।
जन्मकुंडली में कुल 12 भाव होते हैं तथा 12 राशियाँ होती हैं—
मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन।
जन्मकुंडली के प्रथम भाव में जो राशि होती है, उसी के आधार पर लग्न निर्धारित किया जाता है।
मेष लग्न
मेष लग्न वालों का भाग्योदय 16 वर्ष, 22 वर्ष, 28 वर्ष, 32 वर्ष या 36 वर्ष की आयु में हो सकता है।
वृषभ लग्न
वृषभ लग्न वालों का भाग्योदय 25 वर्ष, 28 वर्ष, 36 वर्ष या 42 वर्ष की आयु में होने की संभावना रहती है।
मिथुन लग्न
मिथुन लग्न वालों के लिए 22 वर्ष, 32 वर्ष, 35 वर्ष, 36 वर्ष या 42 वर्ष की आयु भाग्योदयकारी मानी जाती है।
कर्क लग्न
कर्क लग्न वालों का भाग्योदय 16 वर्ष, 22 वर्ष, 24 वर्ष, 25 वर्ष, 28 वर्ष या 32 वर्ष की आयु में हो सकता है।
सिंह लग्न
सिंह लग्न वालों का भाग्योदय 16 वर्ष, 22 वर्ष, 24 वर्ष, 26 वर्ष, 28 वर्ष या 32 वर्ष की आयु में होने की संभावना रहती है।
कन्या लग्न
कन्या लग्न वालों का भाग्योदय 16 वर्ष, 22 वर्ष, 25 वर्ष, 32 वर्ष, 33 वर्ष, 35 वर्ष या 36 वर्ष की आयु में हो सकता है।
तुला लग्न
तुला लग्न वालों का भाग्योदय 24 वर्ष की आयु में हो सकता है। यदि उस समय विशेष प्रगति न हो, तो 25 वर्ष, 32 वर्ष, 33 वर्ष या 35 वर्ष की आयु में भी भाग्योदय के योग बन सकते हैं।
वृश्चिक लग्न
वृश्चिक लग्न वालों का भाग्योदय 22 वर्ष, 24 वर्ष, 28 वर्ष या 32 वर्ष की आयु में हो सकता है।
धनु लग्न
धनु लग्न वालों का भाग्योदय 16 वर्ष, 22 वर्ष या 32 वर्ष की आयु में होने की संभावना रहती है।
मकर लग्न
मकर लग्न वालों का भाग्योदय 25 वर्ष, 33 वर्ष, 35 वर्ष या 36 वर्ष की आयु में हो सकता है।
कुंभ लग्न
कुंभ लग्न वालों का भाग्योदय 25 वर्ष, 28 वर्ष, 36 वर्ष या 42 वर्ष की आयु में होने की संभावना रहती है।
मीन लग्न
मीन लग्न वालों का भाग्योदय 16 वर्ष, 22 वर्ष, 28 वर्ष या 33 वर्ष की आयु में हो सकता है।
महत्वपूर्ण जानकारी
उपरोक्त आयु केवल सामान्य ज्योतिषीय संकेत हैं। वास्तविक भाग्योदय व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा-अंतरदशा, कर्म, प्रयास तथा परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
जीवन में कर्म और भाग्य दोनों का अपना-अपना महत्व है। जब व्यक्ति उचित समय को समझकर सही दिशा में प्रयास करता है, तब सफलता की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। ईश्वर ने कर्म को सर्वोपरि माना है, इसलिए कर्म के साथ भाग्य का सहयोग मिलने पर जीवन में उन्नति और सफलता प्राप्त होती है।
हस्तरेखाविद्, ज्योतिषविद् एवं वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ
ज्योतिषाचार्य रवि भास्कर
गयाजी, बिहार
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